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58 साल में 25 हजार टूटे परिवारों को मिलाया, घरेलू हिंसा से 20 हजार महिलाओं को बचाने का दावा

Kavita2
15 Sept 2026 3:03 PM IST
58 साल में 25 हजार टूटे परिवारों को मिलाया, घरेलू हिंसा से 20 हजार महिलाओं को बचाने का दावा
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अमृतसर। समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय कई संस्थाओं के बीच अमृतसर का ‘निश्शुल्क परिवार परामर्श केंद्र’ अपने लंबे सफर और पारिवारिक विवादों को सुलझाने के प्रयासों के कारण अलग पहचान बनाए हुए है। संस्था की शुरुआत 2 जनवरी 1968 को घरेलू हिंसा की एक घटना के बाद हुई थी। संस्था का दावा है कि बीते 58 वर्षों में उसने 25 हजार से अधिक टूटे परिवारों का पुनर्मिलन करवाया है। इसके अतिरिक्त 20 हजार से अधिक महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने में भी सहायता की गई है।

घरेलू विवादों के कारण बिखरते परिवारों को दोबारा जोड़ने के उद्देश्य से शुरू हुआ यह केंद्र आज हजारों महिलाओं के लिए सहायता और परामर्श का माध्यम बन चुका है। संस्था के साथ वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 2500 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ जरूरतमंद परिवारों और घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं तक सहायता पहुंचाने के काम में सहयोग कर रही हैं।

केंद्र की शुरुआत के पीछे भी एक संवेदनशील घटना जुड़ी हुई है। 2 जनवरी 1968 को सामने आई घरेलू हिंसा की एक घटना ने कुछ लोगों को इस दिशा में संगठित रूप से काम करने के लिए प्रेरित किया। इसी घटना के बाद निश्शुल्क परिवार परामर्श केंद्र की नींव रखी गई। इसका उद्देश्य पारिवारिक विवाद से जूझ रहे लोगों को बिना किसी शुल्क के परामर्श देना और बातचीत के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने में उनकी सहायता करना था।

संस्था ने अपने सफर के दौरान पति-पत्नी के बीच विवाद, घरेलू हिंसा और अन्य पारिवारिक समस्याओं से प्रभावित लोगों की सहायता करने का दावा किया है। केंद्र के अनुसार, पारिवारिक विवाद सामने आने पर दोनों पक्षों की बात सुनने और संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाता है। जहां आपसी समझौते की संभावना होती है, वहां रिश्तों को बचाने और परिवार को फिर से एक करने की दिशा में परामर्श दिया जाता है।

संस्था के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 25 हजार से अधिक बिखराव की कगार पर पहुंचे परिवारों को दोबारा मिलाया जा चुका है। यह संख्या केंद्र की लंबी कार्य अवधि और लोगों तक उसकी पहुंच को दर्शाती है। हालांकि, ये आंकड़े संस्था की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। इतने वर्षों में केंद्र के पास अलग-अलग परिस्थितियों और पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े मामले पहुंचे।

केंद्र ने 20 हजार से अधिक महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने में सहयोग करने का दावा भी किया है। घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए सहायता प्राप्त करना कई बार आसान नहीं होता। सामाजिक दबाव, आर्थिक निर्भरता और परिवार टूटने के डर जैसी परिस्थितियां पीड़ित महिलाओं के सामने मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर मिलने वाला परामर्श और सामाजिक सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निश्शुल्क परिवार परामर्श केंद्र का काम केवल विवाद के बाद दोनों पक्षों को बैठाकर बातचीत करवाने तक सीमित नहीं बताया गया है। संस्था का प्रयास महिलाओं को अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना भी है। इसके साथ ही पारिवारिक विवाद को बढ़ने से पहले बातचीत के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया जाता है। संस्था का मानना है कि कई मामलों में संवाद की कमी, गलतफहमी और आपसी अविश्वास विवाद को गंभीर बना देते हैं।

करीब ढाई हजार महिलाओं का संस्था से जुड़ा होना इसके बढ़ते सामाजिक नेटवर्क को दिखाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाली ये महिलाएं जरूरतमंद लोगों तक संस्था की जानकारी पहुंचाने और प्रभावित परिवारों को परामर्श लेने के लिए प्रेरित करने में भूमिका निभाती हैं। महिलाओं की यह भागीदारी घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद जैसे संवेदनशील विषयों पर खुलकर बातचीत करने का वातावरण तैयार करने में मददगार हो सकती है।

पारिवारिक मामलों में परामर्श की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि प्रत्येक विवाद की परिस्थितियां अलग होती हैं। कई मामलों में परिवार को जोड़ने की संभावना रहती है, जबकि घरेलू हिंसा जैसी स्थिति में प्रभावित व्यक्ति की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। ऐसे में मामले की गंभीरता को समझते हुए उचित सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक होता है।

संस्था ने 58 वर्षों के दौरान बदलते सामाजिक परिवेश के बीच अपना काम जारी रखा है। परिवारों की संरचना, जीवनशैली और सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव के बावजूद घरेलू विवाद और हिंसा जैसी समस्याएं अब भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों में सहायता और परामर्श देने वाली संस्थाएं प्रभावित लोगों के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।

एक घरेलू हिंसा की घटना से शुरू हुआ निश्शुल्क परिवार परामर्श केंद्र आज व्यापक सामाजिक अभियान का रूप लेने का दावा करता है। 25 हजार से अधिक परिवारों के पुनर्मिलन और 20 हजार से ज्यादा महिलाओं को हिंसा से बचाने के आंकड़े संस्था के काम के दायरे को बताते हैं। 58 वर्षों का यह सफर समाज में संवाद, सहयोग और संवेदनशील हस्तक्षेप के महत्व को रेखांकित करता है।

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